
x
Chennai चेन्नई। अभिनेता विजय की आगामी तमिल फिल्म ‘जना नायकन’ की सेंसर सर्टिफिकेट प्रक्रिया में आखिरी समय पर बड़ी अड़चन आ गई है। फिल्म की 9 जनवरी को होने वाली रिलीज से ठीक पहले इस मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट में बहस हुई। मामला यह है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने अचानक फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट रोक दिया और इसे नए सिरे से बनी रिव्यू कमेटी के पास दोबारा जांच के लिए भेज दिया। इससे पहले सेंसर बोर्ड की क्षेत्रीय समिति ने कुछ सीन हटाने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के बाद फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी।
अब रिव्यू कमेटी के पास दोबारा जांच के लिए भेजे जाने से इस फिल्म के रिलीज को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। ‘जना नायकन’ का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस ने बनाया है। फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी अहम भूमिकाओं में हैं। बताया जा रहा है कि यह फिल्म करीब 500 करोड़ रुपए में बनी है और इसे 22 देशों में चार भाषाओं में 5,000 से ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी है। इस फिल्म को लेकर खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसे राजनीति में पूरी तरह उतरने से पहले विजय की आखिरी बड़ी फिल्म माना जा रहा है।
कोर्ट में फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सतीश परासरन और वकील विजयन सुब्रमणियन ने बताया कि सेंसर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन 18 दिसंबर को किया गया था। फिल्म देखने के बाद 22 दिसंबर को क्षेत्रीय सेंसर बोर्ड ने कुछ सीन हटाने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के निर्देश दिए और यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की। निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड के सभी निर्देशों को मानते हुए जरूरी बदलाव कर दिए, लेकिन जब सर्टिफिकेट मिलने की बारी आई तो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की चेयरपर्सन ने ईमेल भेजकर बताया कि फिल्म के कुछ सीन और डायलॉग को लेकर शिकायत मिली है, इसलिए फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया है।
निर्माताओं ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और न ही कहीं सार्वजनिक रूप से दिखाई गई है, ऐसे में किसी तीसरे पक्ष की शिकायत का कोई आधार ही नहीं बनता। उन्होंने यह भी कहा कि जब सेंसर बोर्ड पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट की सिफारिश कर चुका था तो चेयरपर्सन को अकेले यह फैसला लेने का अधिकार नहीं है। निर्माताओं के वकील ने दलील दी कि रिलीज से ठीक पहले सर्टिफिकेट रोकना मनमाना और गलत है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा और जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कोर्ट से तुरंत सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देने की मांग की।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कानून के सामने सभी फिल्में समान हैं, चाहे उनका बजट बड़ा हो या स्टार पावर ज्यादा। उन्होंने बताया कि फिल्म के कुछ सीन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं, इसको लेकर शिकायतें मिली हैं। साथ ही फिल्म में सुरक्षा बलों के चिन्ह (इंसिग्निया) दिखाए गए हैं, जिसके लिए जरूरी अनुमति हो सकती है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कानून के तहत ही कार्रवाई की है और उन्हें अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सवाल किया कि जब फिल्म को पहले ही यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश हो चुकी थी, तो अचानक उसे रिव्यू के लिए क्यों भेजा गया, कौन-कौन से सीन हटाए गए, और जब फिल्म रिलीज ही नहीं हुई थी, तो शिकायत कैसे आ गई।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और कहा है कि ‘जना नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट देने से जुड़ा फैसला 9 जनवरी को सुनाया जाएगा, उसी दिन जिस दिन फिल्म रिलीज होने वाली है।
इस वजह से फिलहाल फिल्म की थिएटर रिलीज अधर में लटकी हुई है।
Tagsविजयजना नायकनतमिल फिल्मसेंसर सर्टिफिकेटमद्रास हाईकोर्टरिव्यू कमेटीयू/ए सर्टिफिकेटफिल्म रिलीज़एच. विनोथकेवीएन प्रोडक्शंसपूजा हेगड़ेममिता बैजूसेंसर विवादजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





